अदाणी समूह के अध्यक्ष गौतम अदाणी ने एजीएम 2021 को संबोधित किया

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अदाणी समूह के अध्यक्ष गौतम अदाणी ने एजीएम 2021 को संबोधित किया

प्रिय शेयरहोल्डर्स,

मुझे अच्छा लगता कि मैं आप सभी का स्वागत व्यक्तिगत रूप से मिलकर करता, लेकिन कोविड-19 की वर्तमान सामाजिक सुरक्षा हिदायतों और नियमों के कारण ये वर्चुअल मीटिंग्स हो रही हैं। हालांकि, मुझे उम्मीद है कि 2022 की हमारी एजीएम की सभा व्यक्तिगत रूप से आमने-सामने बैठ कर होगी – और मुझे वास्तव में आपमें से कुछ लोगों से हाथ मिलाने का अवसर मिलेगा। 

आज मैं आप सभी के साथ पिछले बारह महीनों के कुछ अनुभव, कुछ बातें साझा करना चाहता हूं – जो भयंकर वैश्विक महामारी के कारण असाधारण रूप से कठिन दौर रहा है। यह वैश्विक महामारी आने वाले कई दशकों के लिए दुनिया पर अपनी छाप छोड़ेगी। आ रहे आंकड़े चौंकाने वाले हैं, जो दुखद है। दुनिया भर में लगभग 19 करोड़ मामले दर्ज किए गए हैं, और कोविड-19 महामारी ज्ञात इतिहास में पहले से ही वैश्विक स्वास्थ्य के लिए सबसे व्यापक खतरा बन चुकी है। यह महामारी सबसे घातक महामारियों में से एक है। दुनिया भर में वायरस के प्रसार के कारण, अब तक 40 लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। कोई महादेश, कोई देश और कोई भी समुदाय इसकी चपेट में आने से नहीं बचा है।

हमें यह स्वीकार करना होगा कि हर मौत एक त्रासदी है, और बेशक, हमारे देश को बहुत बेहतर करना चाहिए था, खासकर दूसरी घातक लहर के दौरान तो निश्चित रूप से बेहतर करना था। हालांकि, जब दुनिया के अन्य राष्ट्र इस वैश्विक महामारी से लड़ने के लिए अपने संसाधन व्यवस्थित कर रहे थे, मैंने कई आलोचकों को भारत को घेरे में लेते हुए देखा, जिनका कहना था कि भारत अपने नागरिकों की रक्षा, विशेष रूप से टीकाकरण के लिए बहुत कुछ नहीं कर रहा है।

लेकिन हमें यह समझना चाहिए कि हमारी आबादी के विशाल आकार और घनी आबादी वाले महानगरों को देखते हुए, अधिकांश अन्य देशों के मुकाबले भारत के सामने चुनौती कहीं अधिक है। इस परिप्रेक्ष्य को अगर हम संख्या में देखें तो भारत में तीन महादेशों – यूरोप, उत्तरी अमेरिका और ओशिनिया – के सभी देशों की संयुक्त जनसंख्या से अधिक लोग रहते हैं। दूसरे शब्दों में, हमारा टीकाकरण का प्रयास 87 देशों के संयुक्त प्रयासों से बड़ा होना चाहिए। जबकि तथ्य यह है कि दुनिया भर में दी जाने वाली 320 करोड़ वैक्सीन की खुराक में से 35 करोड़ खुराक भारत में दी गई। हालांकि मैं मानता हूं कि आलोचना उचित है, लेकिन हमें ऐसी किसी बात से प्रेरित नहीं होना चाहिए जो हमारे देश का मनोबल गिराती हैं या असाधारण बलिदान देने वाले फ्रंटलाइन वकर्स का मनोबल तोड़ती हैं।

और ये फ्रंटलाइन वकर्स ही हैं जो हमारी प्रेरणा रहे हैं।

संकट की घड़ी में राष्ट्र का सहयोग करते समय हमने कितना किया जैसाकि हमारे जैसे कॉरपोरेट करते हैं, बल्कि इसके बजाय, यह कदम बढ़ाने के बारे में है ताकि हम सुनिश्चित कर सकें कि हम अपने हिस्से का काम कर रहे हैं। यह हर उस व्यक्ति की मदद के लिए हाथ बढ़ाने के बारे में है जहां तक हम पहुंच सकते हैं, और यह हम जो कुछ भी करते हैं, उस हर काम में राष्ट्र को प्रथम स्थान पर रखने के बारे में है। और राष्ट्र सेवा करने के हमारे कर्तव्य के बारे में हमें फ्रंटलाइन वकर्स के मुकाबले किसी और ने न तो अधिक प्रेरित नहीं किया है और न ही याद दिलाया है। महामारी के दुख-दर्द झेलते हुए, इन फ्रंटनलाइन वकर्स ने सेवा परमो धर्म: के महान भारतीय आदर्श का उदाहरण पेश किया।

अदाणी ग्रुप ने सारी दुनिया से लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन, क्रायोजेनिक टैंक और ऑक्सीजन सिलेंडर जैसी महत्वपूर्ण आवश्यक चीजें हासिल की, लेकिन हमारा योगदान भारतीय वायु सेना की हमारी महिलाओं और पुरुषों द्वारा किए गए प्रयासों की विशालता के सामने छोटा ही रहा है, जिन्होंने आवश्यक आपूर्ति लाने में हमारी मदद के लिए दिन-रात नजदीकी स्थानों से लेकर दूर-दराज के ठिकानों के लिए उड़ाने भरीं।

हमने अपने योगदान से पीएम केयर्स फंड को बढ़ावा दिया है, लेकिन पैसा कभी भी आम लोगों की व्यक्तिगत निस्वार्थता की बराबरी नहीं कर सकता है, जो अपने साथी भारतीयों की मदद के लिए अपनी जरूरतों से ऊपर उठे, जिन्हें वे कभी नहीं जानते थे और जिनसे वे फिर कभी नहीं मिलेंगे।

हमने पूरे देश में वायु, समुद्र, रेल और सड़क मार्ग से लॉजिस्टिक सहायता प्रदान की, और हजारों टन बेहद जरूरी आपूर्ति को गंतव्य स्थलों तक पहुंचाया, लेकिन जब हम इसकी तुलना अपने डॉक्टरों और नर्सों के अतुलनीय महान काम से करते हैं, तो यह कुछ भी नहीं है। उन्होंने अपनी जान जोखिम में डाल कर अपने साथी नागरिकों की सेवा की।

मानवता की व्यक्तिगत कहानियां दिल को छू लेने वाली हैं। हमने जो बलिदान देखे हैं, वे हृदय को झकझोर देने वाले रहे हैं, और इन सबके बीच से गुजरते हुए, हमने ऑक्सीजन वितरण और भर्ती किए गए रोगी की देखभाल में मदद करने की अपनी पूरी कोशिश की है, और इसके लिए हमारे अदाणी फाउंडेशन के लोगों ने संसाधनों और विशेषज्ञों को साथ लेकर योगदान दिया है।

उदाहरण के लिए, कुछ ही दिनों में, हमारी इंजीनियरिंग और मेडिकल टीमों ने अहमदाबाद स्थित अदाणी विद्या मंदिर स्कूल को एक इमरजेंसी केयर सेंटर में बदल दिया – जिसमें सैकड़ों बिस्तर, ऑक्सीजन सपोर्ट और भोजन व्यवस्था उपलब्ध थी। यह सचमुच ‘विद्या-दान से जीवन-दान’ था, क्योंकि हमारे स्कूल के शिक्षण-स्थल से जीवन-स्थल बन गए थे। इसी तरह, भुज और मुंद्रा में हमारे जनरल अस्पतालों को 100% कोविड-केयर अस्पतालों में बदल दिया गया था।

यह सब मेरे हजारों अदाणी परिवार से जुड़े साथियों के समन्वित प्रयासों के बिना संभव नहीं होता, जिन्होंने इस मिशन को चलाने में मदद करने के लिए अपने स्वयं के स्वास्थ्य के जोखिम को नजरअंदाज कर दिया। इसका एक असाधारण उदाहरण भारत के सभी हिस्सों में – पूर्व से लेकर पश्चिम तक और उत्तर से दक्षिण तक – वह दूरी है, जहां तक हमारे लॉजिस्टिक विभाग ने जाकर कोल्ड-स्टोर्ड टीके पहुंचाया था। एक दिलचस्प आंकड़े के तौर पर देखें तो उन्होंने जो दूरी तय की, वह दुनिया की दो बार यात्रा करने के बराबर है। मैं उन सभी लोगों को धन्यवाद देता हूं, और मैं उन्हें यह भी बताना चाहता हूं कि उन्होंने जो किया है और अब भी कर रहे हैं, उस पर मुझे बहुत गर्व है।

इसलिए मैं नर्सों, डॉक्टरों, पैरामेडिक्स, एम्बुलेंस ड्राइवरों, पुलिस बलों, सफाई कर्मचारियों, डिलीवरी कर्मियों, ट्रांसपोर्ट वकर्स और मेरे अपने अदाणी परिवार से जुड़े साथियों के सामने विनम्रता के साथ उपस्थित हूं, जिन्होंने यह सुनिश्चित करने के लिए कि इन कठिन समय में जीवन जितना संभव है, सामान्य बना रहे, अपने कर्तव्य से ऊपर उठ कर काम किया। 

प्रिय शेयरहोल्डर्स,

आइए, अब मैं एक कंपनी के रूप में हमारे परफॉरमेंस के बारे में बात करता हूं, जो वैश्विक स्वास्थ्य में मची उथल-पुथल जितना ही अशांत रहा। पिछला वर्ष उन व्यवसायों के लिए असाधारण रूप से कठिन अवधि थी जिन्होंने इन अभूतपूर्व परिस्थितियों से गुजरते हुए अपनी बिल्कुल नई राह बनायी, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों का सामना करते हुए सफर तय किया और अधिक मजबूत बनकर उभरे। और मुझे गर्व है कि वैश्विक महामारी के विध्वंसकारी धुंध में भी, हमारी छह सूचीबद्ध संस्थाएं मार्केट लीडरशिप, अडाप्टिव मैनेजमेंट और संस्थागत लाभप्रदता के प्रकाशस्तंभ के रूप में खड़ी रहीं।

हमारी सूचीबद्ध संस्थाओं के परफॉरमेंस के कारण इस नए वित्तीय वर्ष के पहले सप्ताह में हमारा  पोर्टफोलियो मार्केट कैपिटलाइजेशन में 100 बिलियन डॉलर को पार कर गया है। यह महत्वपूर्ण वैल्यूएशन किसी पहली पीढ़ी की भारतीय कंपनी के लिए पहली बार है। हालांकि यह गर्व महसूस करने का कारण है, फिर भी वैल्यूएशन केवल एक परिणाम है, लेकिन वास्तव में मेरे लिए महत्वपूर्ण वह रास्ता है जो हमें यहां तक ​​ले आया है। और इससे भी महत्वपूर्ण वह राह है जिस पर हम आगे बढ़े हैं। मैं हामरे परफॉरमेंस और विपरीत परिस्थितियों में प्रदर्शित लचीलेपन का श्रेय उन प्रमुख मूल्यों को देता हूं जिन पर हमारा भरोसा है। ये मूल्य राष्ट्र निर्माण के हमारे उद्देश्य को गति प्रदान करते हैं – और इस गुजरे वर्ष ने हमारे संगठनात्मक मूल्यों में मेरे विश्वास को और मजबूत किया है। उन्होंने न केवल हमें कई बड़ी चुनौतियों को सुरक्षित रूप से पार कराया है, बल्कि उन्होंने हमें बाधाओं का सामना करते हुए मजबूती से उभरने के लिए ताकत प्रदान की है।

जो हमने बीते कल में बनाया है, उसने हमारे आज को सुरक्षित किया है – और आज हम जो निर्माण कर रहे हैं वह बेहतर कल की नींव है। इसके पीछे हमारे तीन प्राथमिक मूल्य हैं – साहस, भरोसा और प्रतिबद्धता। हमारी विकास यात्रा अभी शुरू ही हुई है, और यह हमारी सभी छह सूचीबद्ध संस्थाओं के परफॉरमेंस में दिखता है, जिन्होंने बाजार सूचकांकों से काफी ऊपर जाकर नतीजे प्रदान किए हैं।

वित्तीय वर्ष 2021 के लिए, हमारे सूचीबद्ध पोर्टफोलियो के लिए समेकित ईबीआईटीडीए (या ब्याज, टैक्स, डिप्रेसिएशन और अमोर्टाइजेशन से पहले की आय) 32,000 करोड़ रुपये से अधिक था, जो 22 प्रतिशत की वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि दर्ज किया है। अदाणी के सभी शेयरों ने 100 प्रतिशत से अधिक रिटर्न दिया और हमारे बिजनेस ने सुनिश्चित किया कि हम आपको, हमारे इक्विटी शेयरहोल्डर्स को लगभग 9,500 करोड़ रुपये रिटर्न में दें। यह वर्ष-दर-वर्ष आधार पर प्रॉफिट आफ्टर टैक्स में 166% की वृद्धि है।

अब मुझे आपका ध्यान हमारे दृष्टिकोण की तरफ आकर्षित करना चाहिए कि हम अपने निवेश को कैसे देखते हैं। हम इक्विटी के अंतर-पीढ़ी यानी इंटर-जेनेरेशनल होल्डर्स हैं। हम अपने भागीदारों, अपने अल्पसंख्यक निवेशकों और स्वयं के लिए दीर्घकालिक सस्टेनेबल वैल्यू के निर्माण पर ध्यान केंद्रित करते हैं। हाल ही में, कुछ मीडिया घराने नियामकों की प्रशासनिक कार्रवाइयों से संबंधित लापरवाह और गैर-जिम्मेदाराना रिपोर्टिंग में शामिल रहे। इससे अदाणी के शेयरों के बाजार भाव में अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव आया। दुर्भाग्य से, हमारे कुछ छोटे निवेशक इस विकृत रिपोर्टिंग से प्रभावित हुए, जिसमें कुछ टिप्पणीकारों और पत्रकारों ने यह अर्थ निकाला था कि कंपनियों के पास अपने शेयरहोल्डर्स के ऊपर नियामक शक्तियां हैं और कंपनियां डिसक्लोजर के लिए मजबूर कर सकती हैं।

लंबी अवधि में, इस तरह के डायवर्जन का हम पर कोई असर नहीं पड़ेगा। हम हमेशा एक आत्मविश्वासी संगठन रहे हैं जिसने ऐसी चुनौतियों का सामना किया है जिनकी सामना करने का साहस या कल्पना बहुत कम लोगों ने की होगी। हमें दी गई हर चुनौती हमें मजबूत और बेहतर ही बनाती है।

मैं पिछले वर्ष में हासिल की गईं ग्रुप की कुछ महत्वपूर्ण उपलब्धियों के बारे में बताना चाहता हूं।

अदाणी पोर्ट्स और स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन ने खुद को पोर्ट्स कंपनी से एकीकृत पोर्ट्स एंड लॉजिस्टिक्स कंपनी में बदलना जारी रखा। वित्तीय वर्ष 2021 वास्तव में परिवर्तनकारी वर्ष था और एपीएसईज़ेड ने भारत के पोर्ट-आधारित कार्गो बिजनेस में अपनी हिस्सेदारी 25% तक बढ़ाने और कंटेनर सेगमेंट में बाजार हिस्सेदारी 41% तक बढ़ाने का महत्वपूर्ण कार्य किया। इसने आगे भी विविधता के साथ विकास जारी रखा और मुंद्रा में एलएनजी और एलपीजी कारोबार को और धामरा में एलएनजी ऑपरेशंस के साथ अपने पोर्टफोलियो का विस्तार किया। दुनिया में कोई भी अन्य कंपनी इस पैमाने और पहुंच के साथ पोर्ट बिजनेस का संचालन नहीं करती है।

अदाणी ग्रीन एनर्जी रिन्यूएबल एनर्जी के भविष्य को फिर से परिभाषित कर रही है। 2020 में, हम दुनिया की सबसे बड़ी सोलर कंपनी बन गए। सोलर कंपनी के रूप में हमने 2015 में यात्रा शुरू की थी। और पिछले महीने, एसबी एनर्जी के पांच-गीगावाट पोर्टफोलियो के अधिग्रहण के बाद, लगभग 3.5 बिलियन डॉलर के एंटरप्राइज वैल्यूएशन पर, हमने अपने रिन्यूएबल एनर्जी के 25 गीगावाट के लक्ष्य को निर्धारित समय से चार साल पहले हासिल कर लिया है। मैं दुनिया में किसी अन्य कंपनी या संगठन के बारे में नहीं जानता जिसने अदाणी ग्रुप जितनी तेजी से अपने रिन्यूएबल फुटप्रिंट्स में तेज वृद्धि दर्ज की हो।

अदाणी एंटरप्राइजेज के जरिये, हमने एयरपोर्ट्स के क्षेत्र में कदम रखा और आज भारत में हर चार यात्रियों में से एक यात्री अदाणी एयरपोर्ट से उड़ान भरता है। किसी भी बड़े देश के किसी भी एयरपोर्ट बिजनेस ने कुल यात्री यातायात का 25% हिस्सा हासिल नहीं किया है। कंपनी ने अहमदाबाद, लखनऊ और मैंगलोर में एयरपोर्ट का ऑपरेशंस भी संभाला है तथा गुवाहाटी, जयपुर और तिरुवनंतपुरम के लिए रियायत समझौतों पर हस्ताक्षर किए, और अब मुंबई तथा नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट का अधिग्रहण करने की प्रक्रिया में है। अपने अखिल भारतीय एयरपोर्ट नेटवर्क को विकसित करने के अलावा, हम गैर-यात्री राजस्व को शामिल करने तथा फिजिकल और डिजिटल दोनों इंफ्रास्ट्रक्चर के भीतर संभावनाएं देखने पर भी अधिक ध्यान दे रहे हैं।

कुल मिलाकर, व्यवसायों के एक इनक्यूबेटर के रूप में, अदाणी एंटरप्राइजेज बेजोड़ है तथा नए विचारों और नए बिजनेस मॉडल के लिए दुनिया के सबसे बड़े आधारों में से एक के रूप में अदाणी एंटरप्राइजेज काम करना जारी रखे हुए है।

प्रिय शेयरहोल्डर्स,

हालांकि अपने बिजनेस परफॉरमेंस को लेकर हम संतुष्ट हैं, फिर भी मेरा मानना ​​है कि हमारे तेज विकास का वास्तविक चरण अभी शुरु हो रहा है। ऐसा इसलिए कि हमारे ग्रुप को ऐसी कंपनियों के निवेश सूची से बहुत लाभ होता है जिनके पास विभिन्न क्षेत्रों में हमारे भविष्य के विकास को प्रोत्साहन देने वाली कई रणनीतिक निकटता हैं। 

अब हम जो भी बिजनेस करते हैं, यानी पोर्ट, एयरपोर्ट, लॉजिस्टिक्स, प्राकृतिक संसाधन, थर्मल और रिन्यूएबल पावर जेनरेशन, ट्रांसमिशन, डिस्ट्रिब्यूशन, डेटा सेंटर, रक्षा, कृषि और भोजन, रियल इस्टेट, सिटी गैस यूटिलिटीज, और कई अन्य, उनमें मेरा मानना ​​​​है कि वे सभी स्वयं में उच्च विकास वाले बिजनेस हैं, लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि उनमें से प्रत्येक के पास स्वयं में निकटता हैं, और इसके अलावा, उनके पास नए क्षेत्र भी हैं जिनमें हम आगे बढ़ सकते हैं। यह बहुत ही विशिष्ट ‘अदाणी मॉडल’ है, जो बी2बी2सी की ब्रिजिंग क्षमता के साथ निकटता की शक्ति को जोड़ती है, जो हमें एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाने में मदद करती है जो हमारे लिए अनंत संभावनाओं के द्वार खोल देता है, विशेष रूप से इसकी संभावना तब और बढ़ जाती है, जब भारत जैसे आर्थिक पावरहाउस के सकारात्मक फैक्टर इसका पीछे से समर्थन कर रहे हों। मैं ऐसे किसी अन्य विकास मॉडल के बारे में नहीं जानता जो अगले कई दशकों तक असीमित बी2बी और बी2सी बाजार में अभूतपूर्व और लगातार बढ़ती हुई पहुंच प्रदान करता हो।

प्रिय शेयरहोल्डर्स,

हमारे पूरे कामकाज के दौर में अगर किसी संवेदनशील वर्ष को चिन्हित करें तो वह पिछला वर्ष ही था। फाउंडेशन ने अपनी किसी भी नियमित गतिविधि को बिना रोके, कोविड संबंधी कई स्वास्थ्य संबंधी पहलों का नेतृत्व किया। मैं अपनी पत्नी प्रीति को धन्यवाद देना चाहता हूं, जो अदाणी  फाउंडेशन के निरंतर विस्तार के काम में लगन एवं उत्साह से सदा मौजूद रहीं। वह अदृश्य रहती हैं, लेकिन मैं किसी और से बेहतर जानता हूं कि उनका, खासकर इस महत्वपूर्ण वर्ष में, क्या योगदान रहा है। ‘ग्रोथ विथ गुडनेस’ की सोच को जारी रखने के लिए अपनी-अपनी भूमिकाएं निभाने में, वह मेरी अंतरात्मा हैं।

अदाणी फाउंडेशन की कई पहल जारी हैं, जिनमें से दो पहल मेरी पसंदीदा हैं। मुझे सुपोषण प्राजेक्ट द्वारा हासिल किए गए व्यापक प्रभाव पर गर्व है। सुपोषण प्रोजेक्ट अदाणी फाउंडेशन की एक पहल है जिसने बच्चों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए महिलाओं की एक सेना को तैयार और प्रशिक्षित किया है। सुपोषण ने 33,000 बच्चों को कुपोषण के घेरे से बाहर निकालने में सफलता प्राप्त की है। यह एक ऐसी उपलब्धि है, जो राष्ट्र-निर्माण के अर्थ की गहराई तक जाती है।

एक अन्य प्रोजेक्ट जिस पर मुझे विशेष रूप से गर्व है, वह है हमारा स्पोर्ट्स चैंपियन इन्क्यूबेशन प्रोग्राम। अपने ‘गर्व है’ पहल के अंतर्गत, हम जिन दस एथलीटों की मदद कर रहे हैं, उनमें से सात ने आगामी टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई कर लिया है। ये एथलीट हैं अमित पंघल, रानी रामपाल, दीपक पुनिया, केटी इरफान, रवि कुमार, अंकिता रैना और शिवपाल सिंह। इन सभी युवाओं को  अदाणी फाउंडेशन ने पिछले वर्षों में स्पांसर किया है और ये युवा मुक्केबाजी, हॉकी, कुश्ती, टेनिस और एथलेटिक्स में हमारे देश का प्रतिनिधित्व करेंगे। इसके अलावा, दस जूनियर एथलीटों को दीर्घकालिक स्पोर्ट्स इनक्यूबेशन प्रोग्राम के अंतर्गत आने वाले ग्लोबल इवेंन्ट्स के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। उनमें से अधिकांश सामान्य पृष्ठभूमि वाले हैं और उनकी प्रत्येक कहानी दिल को छू लेने वाली है। उनका पदक जीतना मेरे लिए कम महत्वपूर्ण है, लेकिन जो मायने रखता है वह उनकी कहानियों से मेरे भीतर पैदा होने वाली प्रेरणा है।

प्रिय शेयरहोल्डर्स,

मैं लंबी अवधि में अपने भरोसे के बारे में बात करके अपनी बात समाप्त करता हूं। हाल ही में, कई ऐसे विचार सामने आए जिनके अनुसार अगले चार वर्षों में भारत का पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य हासिल करना आश्चर्य की बात है। मैं इसे व्यक्तिगत तौर पर एक अप्रासंगिक प्रश्न के रूप में देखता हूं। इतिहास ने दिखाया है कि, हर महामारी द्वारा पैदा किए गए संकट में कई सीख मिलती है – और मेरा मानना ​​​​है कि भारत और दुनिया इस महामारी से गुजरते हुए समझदार बने हैं। भारत 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनेगा, और फिर अगले दो दशकों में 15 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की अर्थव्यवस्था बन जाएगा। खपत के आकार और मार्केट कैप दोनों के मामले में भारत सबसे बड़े वैश्विक बाजारों में से एक बनेगा। जैसा कि अतीत में हुआ है, रास्ते पर चलते हुए धक्के लगेंगे और भविष्य में भी ऐसा होने की उम्मीद है। हालांकि, इसमें कोई संदेह नहीं हो सकता है कि सबसे बड़े मध्यम वर्ग के अस्तित्व, कामकाजी उम्र में वृद्धि और खपत करने वाली जनसंख्या में वृद्धि के कारण भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश के अनुरूप भारत के विकास पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। मेरे पास इस पर विश्वास करने का कोई कारण नहीं है कि अगले दो दशकों में हम अपने सामने आने वाली चुनौतियों का उपयुक्त समाधान नहीं कर रहे होंगे।

भारत एक अच्छे दौर की शुरुआत में है जो मध्यम वर्ग की आबादी में वृद्धि से प्रेरित है – और आज हमारे देश में दुनिया के किसी भी देश के मुकाबले का सबसे अधिक समय और संसाधन है। जय हिन्द!

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